आप खुद ठीक कर सकते हैं मोबाइल की टूटी स्क्रीन

स्मार्टफ़ोन और टैबलेट्स की मरम्मत कितनी कठिन है, यह बात हम सब जानते हैं। ऐसे में जब मेरा आईपैड-2 फर्श पर गिरा तो उसकी स्क्रीन चकनाचूर हो गई।

मैंने यूँ ही बैठे-बैठे एक दिन ट्वीट किया कि क्या मैं इसे ख़ुद बना सकती हूँ?

मेरे एक फॉलोअर ने मुझे एक लिंक ट्वीट किया जहाँ मात्र 15 पाउंड में स्क्रीन रिप्लेसमेंट किट मिल रही थी। यही किट ऐपल स्टोर पर 200 पाउंड में मिल रही थी।

मैंने उस लिंक पर क्लिक करके वो किट खरीद ली। इस तरह मैंने ऐपल आईपैड की स्क्रीन ठीक करने के मिशन पर अपना पहला क़दम रख दिया।
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इसके बाद मैं आईफिक्सइट डॉट कॉम वेबसाइट पर गई। यह वेबसाइट एक क्राउडसोर्स वेबसाइट (आम लोगों के पैसे से चलने वाली) है और इस पर उपकरणों की मरम्मत के बारे में वीडियो ट्यूटोरियल होते हैं।

आईपैड मरम्मत वाली गाइड वैसे तो काफ़ी बढ़िया दिख रही थी लेकिन यह थी बहुत जटिल और बारीकियों वाली। वेबसाइट पर इसे ‘बेहद कठिन’ की श्रेणी में रखा गया था। लेकिन मैंने तय कर लिया था कि मैं पीछे नहीं हटूँगी।

मेरा अगला पड़ाव था, ‘रीस्टार्ट प्रोजेक्ट’। यह ऐसे स्वयंसेवियों का समूह है जो नौसिखुआ लोगों को अपने गैजेट बनाने में मदद करता है।
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पिछले एक साल में यह समूह 40 देशों में फैल चुका है। अब यह समूह दफ़्तरों में, शाम को या सप्ताहांत में होनी वाली पार्टियों में ‘लंच आवर क्लिनिक’ का आयोजन करते हैं।

वे लोगों को सलाह देते हैं कि अपने गैजेट की मरम्मत कैसे करें? ज़ाहिर है इन क्लिनिक में शामिल होने वालों को मरम्मत में शामिल जोखिम के लिए भी तैयार रहना होता है।
रिस्टार्ट प्रोजेक्ट की पार्टी में काम करते लोग
crack screen
मैंने अपना आईपैड कैसे बनाया यह बताने से पहले मैं साफ़ कर दूँ कि इस तरह की कार्यशालाओं में वे लोग तो शायद ही शामिल होना चाहें जिनके गैजेट की वॉरंटी अभी बाकी है।

मरम्मत में जोखिम
गैजेट की मरम्मत में बिजली के झटके लगने और उंगुलियों में कांच की किरचें चुभने का भी ख़तरा रहता है- यह हो सकता है।

मेरा आईपैड तो काफ़ी पुराना था और मैं जोखिम उठाने के लिए तैयार थी इसलिए मैं ‘रीस्टार्ट प्रोजेक्ट’ के लंदन में आयोजित एक इवेंट में पहुँच गई।

मैं किसी की देख-रेख के बगैर यह काम नहीं करना चाहती थी। ‘रीस्टार्ट प्रोजेक्ट’ में पहुँचते ही उन्होंने मुझे हीट गन नामक औजार दे दिया। यह हेयर ड्रायर जैसा यंत्र है जिसका उपयोग कल-कारखानों में किया जाता है।

इस हीट गन का प्रयोग उस गोंद को नरम करने के लिए किया जाता है जिससे गैजेट को जोड़ा गया होता है। गैजेट के जोड़ नरम हो जाने के बाद प्लास्टिक और मेटल के दूसरे औजारों की सहायता से इसे खोलना पड़ता है।

कंपा देने वाला अनुभव
अपने आईपैड पर पहला चीरा चलाना सचमुच कंपा देने वाला था।

‘रीस्टार्ट प्रोजेक्ट’ के फ्रांसिस मुझ पर नज़र रखे हुए थे ताकि मुझे कोई चोट न लगे।

निर्देश गाइड को पढ़कर और ट्यूटोरियल वीडियो को देखकर की गई सारी तैयारी ज़मीनी हक़ीक़त के सामने कम ही पड़ती है।

यह सचमुच मुश्किल और थका देने वाला काम है। मैं किसी को राय नहीं दूँगी कि वह वॉरंटी की अनदेखी करके और किसी जानकार की निगरानी के बग़ैर अपने टैबलेट की मरम्मत करे।

‘रीस्टार्ट प्रोजेक्ट’ के सह-संस्थापक जैनेट गुंटर चाहते हैं कि अधिक से अधिक कंपनियां लोगों के अपने गैजेट की मरम्मत ख़ुद करने देने के बारे में सोचें।

वह कहते हैं, “चीज़ों को बनाना दिन प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। मुझे लगता है कि एक समय ऐसा आ जाएगा कि तीन घंटे की कार्यशाला में किसी को उसके गैजेट की मरम्मत करने में मदद करना मुश्किल हो जाएगा।”

मेहनत का फल
मैं पूरी तरह दृढ़प्रतिज्ञ थी। तीन घंटे की मेहनत के बाद मैं अपने आईपैड की स्क्रीन खोलेने में सफल रही।

स्क्रीन का शीशा हटाने के बाद मैं चार नन्हें पेंच खोलकर, बड़े हौले से स्क्रीन को हटाकर टच स्क्रीन कनेक्टर तक पहुँची।

मैंने उसके डाटा केबल निकाले और उन्हें फिर से जोड़ा। मेरा टैबलेट दोबारा रीबूट करने और इंटरनेट से कनेक्ट करने में सफल रहा।

सात घंटे की मेहनत के बाद एलजे रिच अपना आईपैड बनाने में कामयाब रहीं।

मैंने वो ग़लती नहीं की जो लोग अक्सर कर देते हैं। शीशे को हटाते समय मैंने होम बटन के बगल में स्थित वाईफाई/ब्लूटूथ के एंटीनों को टूटने नहीं दिया।

लवफ़ोन कंपनी के एलेक्स पर्जेस्क्यू भी इस कार्यशाला में मौजूद थे। वह इस बात से बहुत प्रभावित थे कि मैंने अपने टैबलेट की स्क्रीन को ख़ुद बनाने का निर्णय लिया है।

उन्होंने मुझे जीपीएस एंटीना को बदलने का मौका दिया। हमने तय किया कि हम अब अगली रीस्टार्ट पार्टी में मिलेंगे।

एलेक्स ने मुझे कुछ उपकरण दिए जो उन उपकरणों से काफी अच्छे थे जो मैंने ऑनलाइन ख़रीदे थे।

आख़िरी सफलता
मैंने आईपैड के लॉजिक बोर्ड में जाकर कैमरा एसेंबली को हटाया, पतले टेप और पेंच को खोला और तक़रीबन सात घंटे की मेहनत के बाद मैं अंततः सफल रही।

किसी पेशेवर के मुक़ाबले मुझे इसे बनाने में पाँच घंटे ज़्यादा लगे। मैंने यह लेख अपने ख़ुद मरम्मत किए आईपैड पर लिखा है।

‘दि रिसर्च प्रोजेक्ट’ की मदद से अपना आईपैड बनाकर मैं बहुत ख़ुश थी। आईपैड खोलने के बाद किसी भी उपकरण को बनाना मुश्किल नहीं लग रहा।

लेकिन मैं इसे बनाना शुरू करने के पहले ही इस बात के लिए तैयार थी कि यह टूट भी सकता है और जो लोग ख़ुद अपने गैजेट की मरम्मत 3 चाहते हैं उनके लिए भी मेरी सलाह है कि वे भी इसके लिए तैयार रहें।

Posted from WordPress via Galaxy Mega

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