World against India

भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए लगभग सभी
विकसित देश पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, ये बात अब
किसी से छुपी नहीं रह
गयी है। इनके लिए मोदी सरकार को गिराना
सबसे पहली प्राथमिकता है। आपने स्वयं महसूस
किया होगा कि मोदी के आने के बाद देश में ऐसे-ऐसे
सामाजिक, सांगठनिक और राजनीतिक
समीकरण बने हैं जो पहले असम्भव से लगते थे।
आज सारे विपक्षी दल, पूरा मुस्लिम समाज,
देशद्रोही एवं अलगाववादी ताकतें, समस्त
आतंकवादी और उग्रवादी संगठन अपने
सभी मतभेद भुलाकर एकजुट और लामबंद हो रहे
हैं। एक बच्चा भी समझ सकता है कि पूर्व में
नामुमकिन सी लगने वाली ये एकजुटता बिना
किसी तीसरे हस्तक्षेप के
कभी संभव ही नहीं हो
सकती। अभी दस दिन भी
नहीं गुजरे जब पूर्वोत्तर से खबर आई कि वहाँ के
सभी उग्रवादी संगठन एक साथ मिलकर
लामबंद हो रहे है। चीन ने इसमें बड़ी
भूमिका निभाई ।
भारत को एक महाशक्ति बनते नहीं देख सकने वाले
दुश्मन देश एवं लगभग सभी विकसित देश
मोदी का विकास रथ रोकने के लगभग प्रत्येक माध्यम
पर जबरदस्त फंडिंग कर रहे हैं। आज भारत का एक जागरूक
नागरिक ये सच भी जानता है।
ऐसे में देश के चौथे स्तम्भ, यानी बहुत पहले से
ही अमीर देशों, इसाई मिश्नरियों एवं अरब
देशों के पैसे पर पलने वाली मीडिया
पीछे कैसे रह जाती।
नरेन्द्र मोदी की छवि धूमिल करने के लिए
मीडिया ने चार मुद्दों पर रणनीति
बनायी।
सबसे पहले अच्छे और बुरे सन्दर्भों का बहाना बनाकर अपने
अस्तित्व के लिए लड़ती हुई एक गुमनाम आम
आदमी पार्टी का जबरदस्त प्रचार किया ताकि
मरती हुई कांग्रेस के विकल्प के तौर पर इसे
मोदी के विरूद्ध खड़ा किया जा सके।
केजरीवाल की सफलता उस योजना का पार्ट
वन था।
दूसरा पार्ट लगभग सभी वामपंथी विचारधारा
से प्रभावित समाजसेवियों, समाजिक संस्थाओं और यहाँ तक कि अन्ना
हजारे एवं बाबा रामदेव को भी मोदी के
विरूद्ध खड़ा दिखाना। अन्यथा क्या वजह है कि अपने लोकपाल
आन्दोलन के समय अपने साथ खड़े एकमात्र राजनीतिक
दल के अविस्मरणीय सहयोग को भुलाकर सुशासन एवं
विकास के अन्य मुद्दों को छोड़कर केवल एक मुद्दे पर
मीडिया बार-बार अन्ना को मोदी के विरूद्ध
खड़ा दिखा रहा है..?
वहीं ब्लैक मनी पर आम जनता और
स्वामी रामदेव को मोदी सरकार के खिलाफ
उकसाने का खेल शुरू हो चुका है और इसकी शुरुआत
खादी की दुकानों पर पतंजलि के उत्पादों को
रखने की रोक लगवाने से हो चुकी है।
खादी की दुकानों पर कई
स्वदेशी ब्रांड आपको मिल जाएंगे, लेकिन जब पतंजलि के
उत्पाद रखने की बात सरकार की ओर से
आई तो आजतक चैनल ने अपने एजेंडा कार्यक्रम में
किसी स्वतंत्र व्यक्ति की जगह
कांग्रेसी प्रवक्ता अमृता धवन से इस पर सवाल उठवा
कर इसे स्वामी रामदेव को मोदी सरकार द्वारा
अवैध तरीके से फायदा पहुंचाने की तरह
पेश करने की शुरुआत की। बाद में
माननीय सूचना प्रसारण और वित्त मंत्री के
जरिए मीडिया प्रेशर से लेकर इस पर रोक लगवाने तक
का खेल खेला गया।
चौथी योजना चुनावों के पहले मोदी
की खोज-खोजकर जुटाई गयी असफलताओं
की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर और ज्यादा से ज्यादा दिखाना।
इसके उलट एक दूसरी योजना पर हिंदुवादी
संगठन काम कर रहे हैं। यदि मोदी ने हिंदुत्व और
राममंदिर के सन्दर्भ में कोई उल्लेखनीय कार्य
नहीं किया तो बाद के कालखंड में शायद मोदी
की जगह लाल किले पर इसी सरकार से
हिन्दुत्व के हित में उल्लेखनीय एवं साहसिक कार्य
करने वाले कोई मंत्री तिरंगा फहराते नजर आएं।
आज मोदी स्वयं भी जानते हैं कि मुसलमानों
ने वोट के रूप में उन्हें धेला भी नहीं दिया
और आगे भी नहीं देंगे क्योंकि वो
मोदी और संघ को भारत के दारूल इस्लाम बनने
की राह में सबसे बड़ा रोड़ा मानते हैं। ऐसे में
मोदी का समर्थन करने से वे अपने ही
ग्रन्थ के आदेशों की अवहेलना करेंगे। मजहब के
मसले पर वे सभी एकजुट हैं क्योंकि उनके लिए
मजहब के सामने विकास की कोई अहमियत
नहीं है। ईराक, अफगानिस्तान, सीरिया
आदि देशों के भुखमरे मुसलमानों ने ये साबित भी कर
दिखाया है।
इसके अलावा देश के सबसे बेशर्म वर्ग सेकुलर हिन्दुओं ने तो
मोदी विरोध को ही अपना धर्म मान लिया
है। जिससे हर दो दिन में मीडिया को मोदी
के विरूद्ध मसाला मिल जाता है और वो उसे लोगों दिमाग में बिठाने
की हद तक उसी खबर को दुहराते रहते
हैं।(जरा ध्यान दीजिएगा कि मोदी
की छवि को नुकसान पहुँचाने वाली खबरों पर
ही मीडिया सबसे ज्यादा फोकस करता है
और सबसे ज्यादा डिबेट करवाता है)
वैसे मोदी की सबसे बड़ी
गलती यह है कि सत्ता में एक साल रहने के बावजूद
उन्होंने अपने विरोधियों को नेस्तनाबूत नहीं किया, जैसा
कि सोनिया गांधी ने किया था। डीडी
न्यूज व राज्यसभा-लोकसभा में आज भी
कांग्रेसी पत्रकार जमे हुए हैं, मीडया में
लगे विदेशी फंडिंग व ब्लैक मनी
की जांच उनके सूचना प्रसारण व वित्त
मंत्री ही रोके पड़े हैं।
मीडिया का मोदी विरोध गुजरात दंगे
की तरह आज भी झूठ पर आधारित है।
उदाहरण देखिए, गुजरात दंगे में ‘क्रिया-प्रतिक्रिया’ की
झूठी थ्योरी टाइम्स ऑफ इंडिया ने
ही प्रसारित की थी और बाद
में एक कोने में माफी मांग ली।
कुछ उसी तरह इस बार मोदी के 10 लाख
रुपए के झूठे शूट की बात भी प्रचारित कर,
टाइम्स ऑफ इंडिया ने चुपके से माफी मांग लिया, लेकिन
मोदी को जितना डैमेज गुजरात में हुआ था, उतना
ही डैमेज उन्हें अमीर का पक्षधर व
गरीब विरोधी के रूप में प्रचारित कर वर्तमान
में भी किया जा चुका है।
पता नहीं, मोदी सरकार में सूचना प्रसारण
मंत्री की हैसितय से काम करने वाले
मंत्री सरकार के हितैषी हैं या
विरोधी जिनके रहते मीडिया आम जनता में
ब्लैक मनी को लेकर भ्रम फैलाने में सफल रहा हैं।
एनजीओ में आ रहे विदेशी व काले धन के
प्रवाह की जांच अभी तक शुरू
नहीं हुई है जबकि मोदी के खिलाफ
गुजरात से आज तक सर्वाधिक साजिश विदेशी फंडेड
एनजीओ गिरोह ने ही की
है। यह सत्ता है, जिसके लिए साम, दाम, दंड, भेद
की नीति आचार्य चाणक्य दे गए हैं। यदि
आप दुश्मनों को नहीं कुचलेंगे तो दुश्मन आपको कुचल
देंगे… सत्ता ऐसे ही चलती है और ऐसे
ही चलनी भी चाहिए। आखिर
प्रकृति भी सबसे मजबूत का ही वरण
करती है, कमजोर पेड़ तो हवा के एक झोंके में उखड़
जाया करते हैं।
अब देखना ये है कि मोदी इन चक्रव्यूहों को कैसे
तोड़ते हैं..!

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